lll नमो भारत lll
सिपाही हूँ रणभूमि की....
अरि के हौसले पस्त करके आऊँगी....
पीठ ना दिखाऊँगी...।
वो जांबाज ही क्या ..जो..
जान के लिए घुटने टेके...
मैं तो दुश्मनों के कदम उखाड़ करके आऊँगी...
पीठ ना दिखाऊँगी...।
मौत के भी मंज़र में...
तबस्सुम की बिजली बनके कौंध जाऊँगी...
जिंदगी सजाके आऊँगी...
पीठ ना दिखाऊँगी....
सिपाही हूँ रणभूमि की...सिपाही हूँ रणभूमि की....।
भीड़ का हिस्सा बनाना .....
मुझको भाता नहीं...
मैं तो कारवाँ बनानें में...
यक़ीन रखती हूँ...।
औरों के पैरों में पड़ा रहना ...
मुझको भाता नहीं...
मैं तो माथे का तिलक बनने में...
यक़ीन रखती हूँ....।
जो तुम प्रसन्नता के लिए.....
प्रतिबद्ध रहोगे...
मानवता के लिए ...
सबकुछ कर लोगे....
सुख-दुःख में...
समानता में आ जायेगी....
हर जिंदगी में..
सुकून भर दोगे..
हर दिल को रौशन कर दूँ ...
ये कोशिश है मेरी....
हर आँखों में चमक भर दूँ...
ये आदत है मेरी....
मानव से मानव जोड़ दूँ...
ये ख्वाहिश है मेरी
नमो भारत
लबों पर दुआ है....तेरे लिए...
मानवता ही आराध्य है मेरे लिए...
न फूल है..न दिया है..न बाती है...
नयनों की ज्योति है....
रूह से खुशबू आती है...
होठों पे गीत हैं...तेरे लिए...
तू बना है....सिर्फ़ मानवता के लिए...
सिपाही हूँ रणभूमि की....
अरि के हौसले पस्त करके आऊँगी....
पीठ ना दिखाऊँगी...।
वो जांबाज ही क्या ..जो..
जान के लिए घुटने टेके...
मैं तो दुश्मनों के कदम उखाड़ करके आऊँगी...
पीठ ना दिखाऊँगी...।
मौत के भी मंज़र में...
तबस्सुम की बिजली बनके कौंध जाऊँगी...
जिंदगी सजाके आऊँगी...
पीठ ना दिखाऊँगी....
सिपाही हूँ रणभूमि की...सिपाही हूँ रणभूमि की....।
भीड़ का हिस्सा बनाना .....
मुझको भाता नहीं...
मैं तो कारवाँ बनानें में...
यक़ीन रखती हूँ...।
औरों के पैरों में पड़ा रहना ...
मुझको भाता नहीं...
मैं तो माथे का तिलक बनने में...
यक़ीन रखती हूँ....।
जो तुम प्रसन्नता के लिए.....
प्रतिबद्ध रहोगे...
मानवता के लिए ...
सबकुछ कर लोगे....
सुख-दुःख में...
समानता में आ जायेगी....
हर जिंदगी में..
सुकून भर दोगे..
हर दिल को रौशन कर दूँ ...
ये कोशिश है मेरी....
हर आँखों में चमक भर दूँ...
ये आदत है मेरी....
मानव से मानव जोड़ दूँ...
ये ख्वाहिश है मेरी
नमो भारत
लबों पर दुआ है....तेरे लिए...
मानवता ही आराध्य है मेरे लिए...
न फूल है..न दिया है..न बाती है...
नयनों की ज्योति है....
रूह से खुशबू आती है...
होठों पे गीत हैं...तेरे लिए...
तू बना है....सिर्फ़ मानवता के लिए...
No comments:
Post a Comment