Wednesday, 13 April 2016

 "उम्मीद बँधानी है,
खुद की ही खुद से,
तक़दीर बनानी है।"

"दरिया है गहरा,
तैर के जाना है,
तोड़ के हर पहरा।"

सादर,
अशोक "मुसाफ़िर"
 सिर्फ़ कागज़ पे लिखे शेर
मेरे,
खुद से कहने की बात आएगी।

इन परिन्दों को गगन दो तो सही,
तब तो उड़ने की बात आयेगी।

तन पे मरहम सा चैन देने के लिए,
धूप   यादों   की   याद आएगी।

जब न कहने को कुछ नहीं होगा,
किसको सुनने की बात आएगी।

चँद शिकवे हैं "मुसाफ़िर" तो क्या,
जाँ  उसूलों  के  साथ जायेगी।

मेरी एक ग़ज़ल से....
अशोक "मुसाफ़िर"

भूख/मंहगाई के आंसू पी रहे हम,
वो कह रहा,उसका सदा ही साथ है।

ख़न्ज़र लिए वो क्या बचाएगा तुझे,
बढ़ रहा तेरी तरफ़ जो हाथ है।

मज़हबी झगडे ज़मीं पर क्यों करे तूँ,
ख़ूँन कब कहता,मेरी क्या ज़ात है।

सच ज़ुबाँ बोले तो उसको बोलने दो,
ये नहीं कहना,नहीं औक़ात है।

नाम काफी है,"मुसाफ़िर"काम भी कर,
गर मानता तूँ,ज़िन्दगी सौग़ात है।

मेरी एक ग़ज़ल से......
अशोक "मुसाफ़िर"

priyanka jee ki dairy se

lll नमो भारत lll
सिपाही हूँ रणभूमि की....
अरि के हौसले पस्त करके आऊँगी....
पीठ ना दिखाऊँगी...।
वो जांबाज ही क्या ..जो..
जान के लिए घुटने टेके...
मैं तो दुश्मनों के कदम उखाड़ करके आऊँगी...
पीठ ना दिखाऊँगी...।
मौत के भी मंज़र में...
तबस्सुम की बिजली बनके कौंध जाऊँगी...
जिंदगी सजाके आऊँगी...
पीठ ना दिखाऊँगी....
सिपाही  हूँ रणभूमि की...सिपाही हूँ रणभूमि की....।


भीड़ का हिस्सा बनाना .....
मुझको भाता नहीं...
मैं तो कारवाँ बनानें में...
यक़ीन रखती हूँ...।
औरों के पैरों में पड़ा रहना ...
मुझको भाता नहीं...
मैं तो माथे का तिलक बनने में...
यक़ीन रखती हूँ....।


जो तुम प्रसन्नता के लिए.....
प्रतिबद्ध रहोगे...
मानवता के लिए ...
सबकुछ कर लोगे....
सुख-दुःख में...
समानता में आ जायेगी....
हर जिंदगी में..
सुकून भर दोगे..


हर दिल को रौशन कर दूँ ...
ये कोशिश है मेरी....
हर आँखों में चमक भर दूँ...
ये आदत है मेरी....
मानव से मानव जोड़ दूँ...
ये ख्वाहिश है मेरी


नमो भारत
लबों पर दुआ है....तेरे लिए...
मानवता ही आराध्य है मेरे लिए...
न फूल है..न दिया है..न बाती है...
नयनों की ज्योति है....
रूह से खुशबू आती है...
होठों पे गीत हैं...तेरे लिए...
तू बना है....सिर्फ़ मानवता के लिए...

Tuesday, 5 April 2016

PRIYAKA JI KI DAIRY SE 4/5/16

सजाके रखती हूँ जिंदगी को..
चुनौतियों से हमेशा..
मुझे पता काँटो में भी फूल मुस्कुराते हैं..
राहों के कंटक मेरा हौसला बढ़ाते हैं....।।
छुपाके रखती हूँ नयनों में...
मोतियों को हमेशा....
मुझे पता है तपिश में...
शबनम भी सूख जाते हैं....।।
मझधार में मेरी नाव...
डूब जाए भी तो क्या...
मैंने विपरीत धारा को भी...
पार करके देखा है....।।

प्रियंका 

संकल्प


संकल्प भरा जीवन मेरा...
मैं मानव-मानव जोड़ूगी...
अंधविश्वास को तार-तार कर..
नवजीवन की राह मैं खोलूँगी....
अधरों पर होगी मुस्काहट..
आँखों में होगी चमक नई....
मैं नाउम्मीदों के जीवन में....
उम्मीद नई मैं भर दूँगी...
मैं मानव-मानव जोड़ूगी..

मै देश की आन बान शान हूँ...
मै भारत की संस्कृति व सम्मान हूँ...
मै राष्ट्र के एकीकरण की पहचान हूँ ..
मैं " भारत का संविधान "हूँ...
हाँ ....हाँ  मैं एक आम इंसान हूँ ...एक आम इंसान ....

Friday, 1 April 2016

"सहारा जब न हो कोई,
सहारे खुद के बन जाना,
सफ़र कितना हो पथरीला,
न अपने ज़ख़्म दिखलाना।

पता देगी खुद ही मंज़िल,
रास्ता एक दिन खुद ही,
बशर्ते बीच रास्तों में,
कहीं सोकर न रह जाना।"

सादर,
अशोक "मुसाफ़िर"

MUSAFIR SIR KI DAIRY SE

"बहारें हों,बहारों से रहा है वास्ता अपना,
इन्हीं से खोज लेंगे हम,चमन से रास्ता अपना।

हमारी है दुआ दिल से,साल सबको मुबारक हो,
मोहब्बत का,शराफ़त का,हक़ीक़त ख़ाब सा अपना।"

आपका,
अशोक "मुसाफ़िर"

LOG PUCHTE HAI KAISE HO

लोग पूछते हैं, कैसे हो
अच्छा हूँ कहना पड़ता है

गुजर रही है किस हालात में
जिंदगी हैरान हूँ मैं ,उलझे
सवालो को समझना पड़ता है
किस मोड पर है इंसा की इंसानियत
हर रोज खोजना पड़ता है
पत्थर को भगवान बनाते लोग
पत्थर के लिए महल बनाते लोग
इंसान को सड़को पर दम तोडना पड़ता है
कैसे मैं अच्छा हूँ..........
अच्छा हूँ कहना पड़ता है

गोदामों में अनाज सड़ता क्यों  है
भूख से फिर इंसान मरता क्यों है
इन पर मौतों राजनीति  क्यों  है
इंसा को इंसान से नही
कुर्सी से प्रीत कियो है
भ्र्ष्टाचार मे जन को पिसना पड़ता है
कैसे मैं अच्छा हूँ............
अच्छा हूँ कहना पड़ता है

दर्द मे है जिंदगी कराह रहा इंसान
एक तरफ जशन मना रहा इंसान
नज़र उठा के देखो सड़कों पर
हर रोज़ ही बचपन रोता है
खिलौने,किताबो की जगह हांथो में
हर रोज़ कटोरा होता है
देख भविष्य देश का,   शर्मिंदा होना पड़ता है
कैसे मैं अच्छा हूँ.........
अच्छा हूँ कहना पड़ता है।

चन्द्रगुप्त 

namo bharat jay bharat

III नमो भारत III जय भारत III




III नमो भारत III जय भारत III
दोस्तों, हम भारत को एकता एवं अखंडता के सूत्र में इस प्रकार बांधना चाहते है कि हर व्यक्ति मानवता के धर्म का अनुशरण करें।
हमारे संगठन का नारा है - ''III नमो भारत III जय भारत III''
इस नारे को लेकर कुछ लोगों के मन में जिज्ञासा उठी, उन्हें इसका अर्थ जानना है। तो हम कहना चाहेंगे कि यह नारा इतना आसान और सरल है कि हर व्यक्ति इसका अर्थ आसानी से समझ सकता है तथा दूसरों को समझा भी जा सकता है।
इस नारे के शुरआत में,  बीच में  तथा अंत में तीन - तीन ऊर्ध्वाधर रेखाओं का तीन बार उपयोग त्रिशरण को दर्शाता है, नमो भारत का मतलब है कि हम भारत राष्ट्र तथा उसकी सम्पूर्ण जनता को  नमन करता हूँ, जय भारत का मतलब है कि भारत राष्ट्र की विजय हो, ऐसी  हम कामना करते है। इस नारे को धर्मनिरपेक्ष बनाया गया है जो जन लोक हितकारी है।
जैसा कि आप सभी को पता है कि हमारा किसी भी राजनैतिक पार्टियों और संघठनों से कोई सम्बन्ध नहीं है। भविष्य में जिससे भी हमारा संबंध होता है, हम आपको विश्वास दिलाना चाहते है वे जरूर हमारे विचारों और मार्गों के सहयोगी होंगे।
अगर आप किसी भी प्रकार के शिकायत और सुझाव देना चाहते है। तो यह हमारा सौभाग्य होगा।
न्याय का साथी एवं सहयोगी
अखण्ड भारत
सम्राट प्रियदर्शी युथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया