Monday, 31 October 2016

SITA murder case


''सीता मौर्य व उसके अजन्मे बच्चे को उसके ससुराल

 पक्ष द्वारा जिन्दा जलाकर मारने का मामला''

LATEST UPDATE ( 28/10/2016)
विदित हो कि सीता मौर्या की सिविल अस्पताल लखनऊ में मृत्यु होने तक पुलिस प्रशासन अपराधी का ही साथ दे रही थी। स्थानीय थाना अध्यक्ष का कहना था की मजिस्ट्रेट का आदेश है कि अपराधियों को गिरफ्तार न किया जाय।
इस बात की सूचना मिलते ही हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय अखंड भारत जी तुरंत फैज़ाबाद पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए दिल्ली से फैज़ाबाद के लिए निकल पड़े। रात्रि में लगभग ४ बजे वे अपने सहयोगियों के साथ फैज़ाबाद पहुंचे। मौके पर पहुँच कर सभी परिजनों के दर्द को अपना दर्द समझते हुए, यह निर्णय लिया कि हम सबसे पहले पुलिस कप्तान, डी आई जी एवं डीएम से बात करेंगे। उसके बाद अगर वे नहीं सुनते हैं, तो तुरंत हम फैज़ाबाद -लखनऊ रोड को जाम करके डेड बॉडी को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ जायेंगे। और तब तक हम भूख हड़ताल जारी रखेंगे जब तक वे हमारी मांगे पूरी नहीं कर देते। भूख हड़ताल के लिए हमारे पास फैज़ाबाद में सक्रिय युवाओं के सौजन्य से पूर्ण तैयारी थी। लगभग पाँच सौ लोग इक्कट्ठा हो चुके थे। बैनर पोस्टर भी बनवा लिए गए थे।
हमारी १५ सदस्यीय टीम जिसमें मा. अखंड भारत (राष्ट्रीय अध्यक्ष), मा. अखंड प्रताप ( जिला प्रभारी),मा. धनी राम (सक्रिय अधिवक्ता फैज़ाबाद), मा.जीतेन्द्र कुमार ( जिला प्रभारी उन्नाव),मा. उमाशंकर ( राष्टीय संगठन सचिव ), मा सुनील , मा. रणजीत, पीड़िता के भाई मा. शिवराम एवम अनूप,मा. रवि , मा धर्मेंद्र आदि थे। हमारी टीम और पुलिस कप्तान में के बीच में लगभग ३० मिनट के वार्तालाप के दौरान कप्तान को मजबूर होकर स्थानीय थानाध्यक्ष को फटकार लगाते हुए, दोनों अपराधी माँ और बेटे को तुरंत अरेस्ट करने का आदेश फ़ोन पर दिया।
जैसे ही हमारी टीम, डीएम ऑफिस में १० मिनट के लिए अंदर पहुंची ही थी की उसकी अपराधी माँ को पुलिस के द्वारा अरेस्ट कर लिया गया । इसके बाद डीएम महोदय ने फ़ोन पर पुलिस कप्तान और थानाध्यक्ष दोनों को फटकार लगाते हुए बेटे को तुरंत अरेस्ट करने का आदेश दिया।
उसके उपरांत पता चला कि अपराधी पति, घर से फरार होकर लखनऊ में है। डीएम ने पूर्ण आश्वासन दिया कि आप लोगों को भूख हड़ताल या लाश को न जलाने जैसे कार्य करने की जरुरत नहीं है। हम आपके साथ है, अतिशीघ्र पति को भी अंदर कर दिया जायेगा।
डीएम महोदय से हमारी वार्तालाप लगभग २० मिनट तक चली।
डीएम पर भरोसा करते हुए हमारी टीम ने अभी भूख हड़ताल को रोकते हुए सीता की लाश जलाने की निर्णय लिया। सीता का अंतिम संस्कार जमथरा घाट पर कर दिया गया।
हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि हम दुःख की इस घड़ी में आपके साथ हैं। अभी हम पुलिस को १ दिन का मौका दे रहें हैं। अगर अरेस्ट नहीं किया जाता है तो हम फिर आएंगे। और इस बार हम किसी से मिलेंगे नहीं, डीएम, कप्तान, डी आई जी खुद मिलने आएंगे।
इस मुहीम में हमारा विशेष साथ एवम सहयोग देने के लिए , डॉ. रामचंदर ( PCS - लखनऊ ) , राबिया बानो ( 30 महिलाओं का ग्रुप) मा. इंद्र प्रताप जी , मा. भरत जी , मा. सुरेंद्र जी , मा. आशीष जी, मा. अजीत जी( ६० साथियों का ग्रुप) मा. गौरव जी,
मा. देवेंद्र जी( इंडियन आर्मी) , मा. कुलभूषण जी , मा. शिखर जी, मा. उत्कर्ष जी, मा. मुकुल जी, मा. विशाल जी , मा. अभिजीत जी, मा.प्रशांत जी मा. दीपक ,मा. मनीष तथा इनके साथ आये हुए साथियों का हम और हमारी टीम तहे दिल से इनका आभार व्यक्त करती हैं।
नोट- लखनऊ प्रभारी एवं हमारी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. प्रियंका जी " हम हैं ना " की तबियत ख़राब होने के कारण, वह मौके पर नहीं पहुँच सकी, इस बात का उन्हें दुख है, परन्तु बराबर संपर्क में रह कर हमारे हौसले और दिशा निर्देश देती रहीं है।
हमारे ने विशेष सहयोगी मा अतिंदर प्रताप, मा. सूर्यामित, मा, चंद्रगुप्त जी, मा. अशोक मुसाफिर आदि साथियो का SPYFI , इस अमूल्यनिय सहयोग के लिए कोटि कोटि आभार।
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updated on 26/10/2016
चलो फैज़ाबाद - चलो फैज़ाबाद 
आप सभी को सूचित किया जाता है "सीता मौर्या एवं उसके अजन्मे बच्चे की देहांत के बाद संगठन ने निर्णय लिया है कि दिनाक : २७/१०/16 (27.10.2016) को दिन में प्रातः ८ (8) बजे से फैज़ाबाद में,कचहरी के सामने फैज़ाबाद - लखनऊ राजमार्ग पर लाश के साथ धरना दिया जायेगा और जब तक पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार नहीं कर लेती तब तक लाश का अंतिम संस्कार नहीं किया जायेगा। ऐसा निर्णय इस लिए लिया गया है क्योंकि अपराधी अभी खुले में घूम रहा है और फैज़ाबाद पुलिस अभी तक उसे गिरफ्तार नहीं कर पायी और न ही उसके लिए कोई प्रयास ही किया जा रहा है। अतः आप सभी लोंगो से अनुरोध है की 'सीता मौर्या और उसके अजन्मे बच्चे ' की दर्दनाक मृत्यु के बदले अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करवाने व फाँसी की सजा दिलवाने में उनके परिवार वालों की मदद के लिए सुबह फैज़ाबाद पहुचे। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी अपनी टीम के साथ आज दिल्ली से फैज़ाबाद के लिए निकल चुके हैं और आप लोंगो से भी अनुरोध है कि आप लोग भी फैज़ाबाद पहुचने का कष्ट करें।
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updated on 25/10/2016
साथियों, बड़े ही दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है की सीता मौर्य का देहांत, आज लगभग 3:30 AM पर सिविल अस्पताल लखनऊ में हो गया है। पोस्टमार्टम लगभग 12:00 PM बजे होना है। उसके बाद लाश को फैज़ाबाद में ले जाया जायेगा। हम सभी ने मिलकर उसे बचाने की पूर्ण कोशिश की है, परन्तु हम उसे बचाने में असफल रहे। ठीक एक दिन पहले उसकी हालत में काफी सुधार था, परंतु उसके पेट में बच्चे की मौत के कारण, उसे बचाया नहीं जा सका है। इस प्रकार अपराधी दोनों को मौत के घाट उतारने में सफल रहे हैं।
सम्पूर्ण spyfi परिवार, दुःख की इस घड़ी में पीड़ितों के साथ है तथा बेहद दुखी है। पीड़िता के अपरधियों को न्याय दिलाने (आजीवन कारावास/फांसी) में पूर्ण भूमिका निभाएगी इसके लिए हम प्रतिवद्ध हैं। 
साथियों, हमें सक्रिय रहें की जरुरत है। अपराधी हमारे आपके बीच में ही छुपे हैं। समय से पहले, हम अपनी सक्रियता दिखाकर है, पीड़ितों की जान बचा सकते हैं। अगर देर हुई तो हम कुछ भी नहीं कर सकते है। न जाने कितनी सीताओं और अजन्मे बच्चों को मौत के घाट उतारा जायेगा और आये दिन हो रहा है। अपने पास पड़ोस /अपने घर की इस प्रकार की कोई भी सूचना हो तो हम तक जरूर पहुंचाएं। हम समय रहते समस्या का समाधान निकालने का पूर्ण प्रयास करेंगे। उम्मीद है आप सभी इस मुहिम में हमारा पूर्ण साथ एवम सहयोग देंगे। 
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(UPDATE OF 24/10/16) 
सीता मौर्य की हालत में काफी सुधार। spyfi से उमाशंकर एवम डॉ प्रियंका जी की निगरानी में लखनऊ सिविल अस्पताल, हजरत गंज में हो रहा है इलाज।
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पूरा मामला यह कि..(UPDATE OF 22/10/16) 
''फैज़ाबाद शहर में गर्भवती महिला की को जिन्दा जला कर मारने की 70% कोशिश सफल रही, महिला बाल बाल बची ''
विदित हो कि पीड़िता सीता मौर्या पत्नी सुरेश मौर्य निवासी अंगूरीबाग, फैज़ाबाद सिटी, फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, की निवासी है। सीता की शादी के 26 -27 february 2016 को हुई थी। सीता वर्तमान में गर्भवती भी है। 
शादी में सीता के मायके वालों के द्वारा पर्याप्त मात्रा में दहेज़ देने के बावजूद, ससुराल पक्ष की भूख न मिटने के कारण शादी के बाद से ही कम दहेज मिलने को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था। धीरे धीरे मामला काफी बढ़ गया था। इसमे सीता की दो नन्द महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थी। परिवार में ससुराल पक्ष के लोग, न तो उसको खाना देते थे। न ही उसके हाथ का बना हुआ खाना खाते थे। 
कुछ दिन पहले, सासु और बहनो ने मिलकर उसके पति को कुछ दिनों के लिए बाहर भेज दिया था। उनका कहना था की उन सभी को यह नहीं पता है की वह कहाँ गया है। अब वे सीता की देखभाल नहीं कर सकते हैं। इसलिए उसे अपने मायके जाने को बाध्य कर रहे थे।
जब इसकी सूचना हमारे वर्तमान फैज़ाबाद spyfi प्रभारी माननीय अखण्ड प्रताप जी (9453311550/7007510780) को मिली। तो उन्होंने अपने टीम को लेकर उसके ससुराल वालों से मिलकर मामले को शांत कराने की कोशिश की। ससुराल पक्ष के न मानने पर, हमने फैज़ाबाद के महिला थाने में उसके खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई गई थी। जिसमे उसके ससुराल पक्ष को थाने में बुलाकर समझौता भी कर दिया गया था। दोनों पक्ष सन्तुष्ट भी थे। अच्छे से रहने का वादा भी किया था।
कल, उसके पति तथा बहनो द्वारा उसे मिटटी का तेल डालकर जला देने की पूर्ण कोशिश उसके ससुराल पक्ष द्वारा की गई। जिसमे सीता लगभग 70% जल गई है। 
मौके पर उसके पडोसी व् रिस्तेदार द्वारा, उसे जिलास्पताल में भर्ती कराया गया। मौके पर उस पर दबाव बनाकर गलत बयान भी लिया गया था। जिसके चलते मामले को रफा दफा करने की पूर्ण कोशिश की जा रही थी। सूचना मिलते ही हमारे वर्तमान फैज़ाबाद spyfi प्रभारी माननीय अखण्ड प्रताप जी ने अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचकर मामले को गंभीरता से लेते हुए, पीड़िता को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। थाने का घेराव तथा पोलिस कप्तान एवम जिलाधिकारी के बात करके हमने पीड़िता का ब्यान दुबारा दिलवाया है। जिसमे सीता का पति, माँ और उसकी बहने शामिल है। पुलिस ने तलास शुरू कर दी है। अपराधी घर छोड़कर फरार है। तलास जारी है। .

सत्य, अहिंसा एवं न्याय का साथी तथा सहयोगी 
सम्राट प्रियदर्शी यूथ फाउंडेशन ऑफ इंडिया
विशिष्ट भारतीय समाजसेवी संगठन
www.spyfi.org, info@spyfi.org
9891367219/+919161891455/ SURYAMIT- 9555709874

Wednesday, 13 April 2016

 "उम्मीद बँधानी है,
खुद की ही खुद से,
तक़दीर बनानी है।"

"दरिया है गहरा,
तैर के जाना है,
तोड़ के हर पहरा।"

सादर,
अशोक "मुसाफ़िर"
 सिर्फ़ कागज़ पे लिखे शेर
मेरे,
खुद से कहने की बात आएगी।

इन परिन्दों को गगन दो तो सही,
तब तो उड़ने की बात आयेगी।

तन पे मरहम सा चैन देने के लिए,
धूप   यादों   की   याद आएगी।

जब न कहने को कुछ नहीं होगा,
किसको सुनने की बात आएगी।

चँद शिकवे हैं "मुसाफ़िर" तो क्या,
जाँ  उसूलों  के  साथ जायेगी।

मेरी एक ग़ज़ल से....
अशोक "मुसाफ़िर"

भूख/मंहगाई के आंसू पी रहे हम,
वो कह रहा,उसका सदा ही साथ है।

ख़न्ज़र लिए वो क्या बचाएगा तुझे,
बढ़ रहा तेरी तरफ़ जो हाथ है।

मज़हबी झगडे ज़मीं पर क्यों करे तूँ,
ख़ूँन कब कहता,मेरी क्या ज़ात है।

सच ज़ुबाँ बोले तो उसको बोलने दो,
ये नहीं कहना,नहीं औक़ात है।

नाम काफी है,"मुसाफ़िर"काम भी कर,
गर मानता तूँ,ज़िन्दगी सौग़ात है।

मेरी एक ग़ज़ल से......
अशोक "मुसाफ़िर"

priyanka jee ki dairy se

lll नमो भारत lll
सिपाही हूँ रणभूमि की....
अरि के हौसले पस्त करके आऊँगी....
पीठ ना दिखाऊँगी...।
वो जांबाज ही क्या ..जो..
जान के लिए घुटने टेके...
मैं तो दुश्मनों के कदम उखाड़ करके आऊँगी...
पीठ ना दिखाऊँगी...।
मौत के भी मंज़र में...
तबस्सुम की बिजली बनके कौंध जाऊँगी...
जिंदगी सजाके आऊँगी...
पीठ ना दिखाऊँगी....
सिपाही  हूँ रणभूमि की...सिपाही हूँ रणभूमि की....।


भीड़ का हिस्सा बनाना .....
मुझको भाता नहीं...
मैं तो कारवाँ बनानें में...
यक़ीन रखती हूँ...।
औरों के पैरों में पड़ा रहना ...
मुझको भाता नहीं...
मैं तो माथे का तिलक बनने में...
यक़ीन रखती हूँ....।


जो तुम प्रसन्नता के लिए.....
प्रतिबद्ध रहोगे...
मानवता के लिए ...
सबकुछ कर लोगे....
सुख-दुःख में...
समानता में आ जायेगी....
हर जिंदगी में..
सुकून भर दोगे..


हर दिल को रौशन कर दूँ ...
ये कोशिश है मेरी....
हर आँखों में चमक भर दूँ...
ये आदत है मेरी....
मानव से मानव जोड़ दूँ...
ये ख्वाहिश है मेरी


नमो भारत
लबों पर दुआ है....तेरे लिए...
मानवता ही आराध्य है मेरे लिए...
न फूल है..न दिया है..न बाती है...
नयनों की ज्योति है....
रूह से खुशबू आती है...
होठों पे गीत हैं...तेरे लिए...
तू बना है....सिर्फ़ मानवता के लिए...

Tuesday, 5 April 2016

PRIYAKA JI KI DAIRY SE 4/5/16

सजाके रखती हूँ जिंदगी को..
चुनौतियों से हमेशा..
मुझे पता काँटो में भी फूल मुस्कुराते हैं..
राहों के कंटक मेरा हौसला बढ़ाते हैं....।।
छुपाके रखती हूँ नयनों में...
मोतियों को हमेशा....
मुझे पता है तपिश में...
शबनम भी सूख जाते हैं....।।
मझधार में मेरी नाव...
डूब जाए भी तो क्या...
मैंने विपरीत धारा को भी...
पार करके देखा है....।।

प्रियंका 

संकल्प


संकल्प भरा जीवन मेरा...
मैं मानव-मानव जोड़ूगी...
अंधविश्वास को तार-तार कर..
नवजीवन की राह मैं खोलूँगी....
अधरों पर होगी मुस्काहट..
आँखों में होगी चमक नई....
मैं नाउम्मीदों के जीवन में....
उम्मीद नई मैं भर दूँगी...
मैं मानव-मानव जोड़ूगी..

मै देश की आन बान शान हूँ...
मै भारत की संस्कृति व सम्मान हूँ...
मै राष्ट्र के एकीकरण की पहचान हूँ ..
मैं " भारत का संविधान "हूँ...
हाँ ....हाँ  मैं एक आम इंसान हूँ ...एक आम इंसान ....

Friday, 1 April 2016

"सहारा जब न हो कोई,
सहारे खुद के बन जाना,
सफ़र कितना हो पथरीला,
न अपने ज़ख़्म दिखलाना।

पता देगी खुद ही मंज़िल,
रास्ता एक दिन खुद ही,
बशर्ते बीच रास्तों में,
कहीं सोकर न रह जाना।"

सादर,
अशोक "मुसाफ़िर"

MUSAFIR SIR KI DAIRY SE

"बहारें हों,बहारों से रहा है वास्ता अपना,
इन्हीं से खोज लेंगे हम,चमन से रास्ता अपना।

हमारी है दुआ दिल से,साल सबको मुबारक हो,
मोहब्बत का,शराफ़त का,हक़ीक़त ख़ाब सा अपना।"

आपका,
अशोक "मुसाफ़िर"

LOG PUCHTE HAI KAISE HO

लोग पूछते हैं, कैसे हो
अच्छा हूँ कहना पड़ता है

गुजर रही है किस हालात में
जिंदगी हैरान हूँ मैं ,उलझे
सवालो को समझना पड़ता है
किस मोड पर है इंसा की इंसानियत
हर रोज खोजना पड़ता है
पत्थर को भगवान बनाते लोग
पत्थर के लिए महल बनाते लोग
इंसान को सड़को पर दम तोडना पड़ता है
कैसे मैं अच्छा हूँ..........
अच्छा हूँ कहना पड़ता है

गोदामों में अनाज सड़ता क्यों  है
भूख से फिर इंसान मरता क्यों है
इन पर मौतों राजनीति  क्यों  है
इंसा को इंसान से नही
कुर्सी से प्रीत कियो है
भ्र्ष्टाचार मे जन को पिसना पड़ता है
कैसे मैं अच्छा हूँ............
अच्छा हूँ कहना पड़ता है

दर्द मे है जिंदगी कराह रहा इंसान
एक तरफ जशन मना रहा इंसान
नज़र उठा के देखो सड़कों पर
हर रोज़ ही बचपन रोता है
खिलौने,किताबो की जगह हांथो में
हर रोज़ कटोरा होता है
देख भविष्य देश का,   शर्मिंदा होना पड़ता है
कैसे मैं अच्छा हूँ.........
अच्छा हूँ कहना पड़ता है।

चन्द्रगुप्त 

namo bharat jay bharat

III नमो भारत III जय भारत III




III नमो भारत III जय भारत III
दोस्तों, हम भारत को एकता एवं अखंडता के सूत्र में इस प्रकार बांधना चाहते है कि हर व्यक्ति मानवता के धर्म का अनुशरण करें।
हमारे संगठन का नारा है - ''III नमो भारत III जय भारत III''
इस नारे को लेकर कुछ लोगों के मन में जिज्ञासा उठी, उन्हें इसका अर्थ जानना है। तो हम कहना चाहेंगे कि यह नारा इतना आसान और सरल है कि हर व्यक्ति इसका अर्थ आसानी से समझ सकता है तथा दूसरों को समझा भी जा सकता है।
इस नारे के शुरआत में,  बीच में  तथा अंत में तीन - तीन ऊर्ध्वाधर रेखाओं का तीन बार उपयोग त्रिशरण को दर्शाता है, नमो भारत का मतलब है कि हम भारत राष्ट्र तथा उसकी सम्पूर्ण जनता को  नमन करता हूँ, जय भारत का मतलब है कि भारत राष्ट्र की विजय हो, ऐसी  हम कामना करते है। इस नारे को धर्मनिरपेक्ष बनाया गया है जो जन लोक हितकारी है।
जैसा कि आप सभी को पता है कि हमारा किसी भी राजनैतिक पार्टियों और संघठनों से कोई सम्बन्ध नहीं है। भविष्य में जिससे भी हमारा संबंध होता है, हम आपको विश्वास दिलाना चाहते है वे जरूर हमारे विचारों और मार्गों के सहयोगी होंगे।
अगर आप किसी भी प्रकार के शिकायत और सुझाव देना चाहते है। तो यह हमारा सौभाग्य होगा।
न्याय का साथी एवं सहयोगी
अखण्ड भारत
सम्राट प्रियदर्शी युथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया

Tuesday, 29 March 2016

rastriyta or siksha me sabandh

III नमो भारत III जय भारत III
 “राष्ट्रीयता और शिक्षा का सबंध”
यह सोच कर बहुत आश्र्चर्य होता है की भारत में कभी राष्ट्रीयता का बोध नहीं कराया जाता , शायद इस पर यहां के लोगो को अधिक आश्रचर्य हो।  क्योंकि राष्ट्रीयता एक नया शब्द भारत के लिए है।  लेकिन इस शब्द में निहित भावना ने सारी दुनिया में कमाल कर रखा है। इग्लैंड, जर्मनी , जापान , फ्रांस , अमेरिका  रूस यही राष्ट्रीयता की भावना से अोत- प्रोत नागरिक ने जिस हिम्मत और उत्साह के साथ राष्ट्र की उन्नति में योगदान किया है।  
हमारे देश के शासकों में राष्ट्रीयता का आभाव है आज ६८ वर्षो की आजादी के बबद हम अन्न , रुई , उवर्रक, मशीनरी और इस्पात के मामले में स्वालम्बी नहीं हो सके। 

भारत में प्रत्येक नागरिक को शिक्षा क्यों दिया जा रहा है , इसे प्रत्येक नागरिक को बताया जाना चाहिए।  तमाम ऐसे देश हैं जहां शिक्षा का उदेश्य बताया जाता है।  इजराइल में किसी विधार्थी से आप पूछेंगे की तुम शिक्षा किस लिए ग्रहण करते हो तो उसका उत्तर होगा की राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा के शिक्षा ग्रहण करते हैं।  राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रत्येक  विधार्थी को सैनिक शिक्षा अनिवार्य कर दी गई।  इस तरह की सैनिक शिक्षा कभी भारत में २३०० वर्षो पहले दी जाती थी।  यही कारण है की २५ लाख की आबादी वाला इजराइल १० करोड़ की आबादी वाली अरब राष्ट्रों से अकेले मुकाबला करता रहता है।  यह उदेश्यपूर्ण शिक्षा का कमाल है। 
 जापान में किसी भी विदार्थी से पूछेंगे की शिक्षा किस लिए ग्रहण क्र रहे हो तो वह टपक से उत्तर देगा की जापन के स्वाभिमान और आर्थिक विकास के लिए शिक्षा ग्रहण करते है।  जापान के लिए शिक्षा ग्रहण करते है।  जापान में तो यहाँ तक विद्यार्थी को शिक्षा दी जाती है की मन लो तुम्हारे इष्ट देव, जिसे तुम पूजते हो वही जापान पर आक्रमण कर दे तो क्या करोगे।  वंहा इसका उत्तर तपाक से मिलेगा की राष्ट्र की सुरक्षा के लिए इष्ट देव से भी लड़ना पड़े तो लड़ा जाएगा।  यही कारण है की इन देशों में प्रत्येक व्यक्ति को अपने देश की रक्षा व् स्वाभिमान अपने देश की रक्षा व् स्वाभिमान कायम रखने का ध्यान रहता है और उसके लिए उसे जान भी देने में रंचमात्र भी हिचक नहीं रहता,
आज भारत में किसी विद्यार्थी या शिक्षक से पूछ दो की तुम शिक्षा किस लिए ग्रहण करते हो तो उत्तर शायद यही मिलेगा की अपने विकास और नौकरी पाने लिए शिक्षा ग्रहण करते है।  कोई यह नहीं कहेगा कि भारत की आनवान शान की रक्षा और भारत को आर्थिक रूप से संपन्न राष्ट्र बनने के लिए शिक्षा ग्रहण करR रहे है। 
सबसे पहले शिक्षा का उदेश्य सारे देश के स्कूलों में बताना चहिए।  सारे देश के विद्यार्थी को यह भली - भांति जान सके की वह इसलिए पढ़ते है कि जिससे राष्ट्र का स्वाभिमान व् एकता रख सके।  शिक्षा का उदेश्य राष्ट्र का स्वाभिमान एकता कायम रखना है।  शायद आज सारे देश के विधालयों में शिक्षा का उदेश्य गगयब है।  केवल ज्ञान प्राप्त करना ही शिक्षा का उदेश्य कैसे हो सकता है।  उदेश्यहीन शिक्षा की वजह से ही देश के नौजवान भटक रहे है, जातियता , धार्मिक उन्माद , भाषाई क्षेत्रीय ताकते सर उठाने लगती है।  राष्ट्रीयता युक्त शिक्षा दिए बिना देश का विकाश संभव नहीं है। 



सम्राट प्रियदर्शी युथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया


Monday, 28 March 2016

MUSAFIR SIR KI DAIRY SE 29/3/2016/2

(पथिक)

चल दे पथिक,रख हौसला,इस बार अब तू,
मत चूकना,गिर कर सँभल,ना हार अब तू।

जब राह में मौसम बहुत,पैदा करें सौ आँधियाँ,
तू मूक दर्शक है नहीं,,जो देख ले बर्वादियाँ।
बस तान सीना शौर्य से,दे हौसलों को धार अब तू।

मत चूकना.....
चल दे........

जो सो गया आराम कर,जीवन सुला उसने दिया,
मुख मोड़कर,सब छोड़कर,विष ज़िन्दगी को दे दिया।
तू बैठ ना,यूं हार कर,बस पार कर मँझधार अब तू।

मत चूकना.....
चल दे....

बन पारखी,बन सारथी,मत भाग जा,तू आ निकट,
संकल्प कर,बस बन निडर,संकट पड़े कितना विकट।
तू सर उठा कर चल इधर,फिर जीत ले संसार अब तू।

मत चूकना.....
चल दे.....

हैं वक़्त के बाक़ी निशाँ,जो साथ कुछ हमदर्द हैं,
कुछ आ गले तुझको मिले,कुछ दूर से ख़ुदग़र्ज़ हैं।
एहसान सब का मान कर,सबका करे आभार अब तू।

मत चूकना....
चल दे.....

क्या है सही,क्या है ग़लत,है भेद तुझको जानना,
क्या पाप है,क्या पुण्य है,पल-पल यही पहिचानना।
सुख में सना,दुःख हो घना,पर सम करे व्यवहार अब तू।

मत चूकना......
चल दे....

ये क्यों "मुसाफ़िर"है घुटन,आँसू सुखा,कर ले जतन,
ना हाथ पर तू हाथ रख,बस फेंक दे अपना कफ़न।
देकर चुनौती मौत को,बन वीर कर उद्धार अब तू।

मत चूकना....
चल दे......

गीत ....अशोक "मुसाफ़िर"

MUSAFIR SIR KI DAIRY SE 29/3/2016

जागरण गीत

सफ़र में उलझनें लाख़ों,मगर डर कर नहीं हारा,
खड़ा में इक तरफ़ तनकर,ज़माना इक तरफ़ सारा।

लौटना गर मुझे होता,चमन को छोड़ ना आता,
ग़लीचों की जगह काँटों से लाख़ों ज़ख्म ना खाता।
चाहे अब बर्फ़ झरती हो,चढ़े या सूर्य का पारा,
ज़माना छोड़ दे कहना,के मैं हूँ एक बेचारा।

सफ़र में......
खड़ा मैं.....

कोताही हो नहीं सकती,मैं सो लूँ तानकर चादर,
फ़साना एक ही मेरा,सांस मंज़िल पे लूँ जाकर।
ख़बर बस एक ही रखता,मैं मोडूँ वक़्त की धारा,
निशाना एक ही मेरा,तीर अर्जुन का झंकारा।

सफ़र में.....
खड़ा मैं.....

करें आभार उनका हम,दिया संविधान का तोहफ़ा,
जो पाए पूज्य बाबा साहिब से हम, जीवन को हर मौक़ा।
मैं चाहूँ शील का पालन, करे हर जीव ही आख़िर,
नहीं गौतम की धरती पर, करे हिंसा कोई आकर।
धम्म का गान गुंजित हो,बुद्धमय हो जगत सारा।

सफ़र में......
खड़ा मैं....

पर्वतों से निवेदन है के रस्ता छोड़ दें मेरा,
यहाँ हिम्मत हवा में क्या,जो रास्ता रोक ले मेरा।
न रुकना है,न झुकना है,यही बस एक की नारा,
तूफ़ानों को चटाना धूल,है बस एक हुंकारा।

सफ़र में.....
खड़ा मैं....

फ़तह होगी उन्हीं की,हौसलों से काम जो लेंगे,
वक़्त के घूमते पहिये की नाड़ी थाम जो लेंगे।
"मुसाफ़िर"हौसलों के गीत गा,तू फिर से दोबारा,
खड़ा तू इक तरफ़ तनकर,ज़माना इक तरफ़ सारा,
ज़माना गा उठेगा संग तेरे,तू नहीं हारा।

सफ़र में......
खड़ा मैं....

गीत.....अशोक "मुसाफ़िर"

MUSAFIR SIR KI KALAM

(ग़ज़ल)
जिनको समझे हैं हम जज़्बा-ए-जिगर,
उनको ख़ुद की कहाँ रहती है फ़िकर।

ये न समझें के शिकायत है हमें,
दिल ये कहता है, परेशां वो उधर।

है अगर खौफ़ न ज़ुल्मातों का उन्हें, 
अपनी क्यों छोड़ेंगे परिंदे ही बसर।

आँसू बन, टूट गया कब का बह कर,
ख़ाब आँखों को न आये वो नज़र। 

था भड़काया उसे,जितना था बस में,
बस ये शोले ही नज़र आएं इधर।

मिलना और मिलकर बिछुड़ जाना बस,
कोई आ देखे,कितना है तन्हा  शहर।

कोई पैग़ाम,प्यामी आ इधर को दे दे,
फिर न उजड़ेगा किसी का भी घर। 

सब्र होगा,जो वफ़ा आ के करोगे,
गोया सहनी है, हिज्र यूँ ही "मुसाफ़िर"।

ग़ज़ल.....अशोक "मुसाफ़िर"

Sunday, 27 March 2016

"MUSAFIR" KI KALAM SE

"बड़ा नुकसान करती है,
ये हिंसा रोज़ घर आकर।
चाहे मालिक किसी का हो,
या हिंसक हो कोई चाकर।।
इसने अफ़सर नहीं छोड़े,
इसने दफ़्तर नहीं छोड़े।
अहिंसा को कहाँ खोजें,
किसे आवाज़ दें जाकर।।"
"कलम से बह रहे हैं दर्द,
सारे इस ज़माने के।
जिन्होंने ज़ुल्म बरपाया,
हमारे जाने-माने थे।।
हमारी नफ़रतों ने राख़ कर दी,
ख़ुद की यूँ बस्ती।
लापता हो गई सारी,
मोहब्बत आशियाने से।।"
"कमल दल खिल उठें लाखों,
तुम्हारा जब सहारा हो।
जगत फलने लगे उस पल,
तुम्हारा जब नज़ारा हो।।
तुम्हारे धम्म और शीलों को,
अब आतंक ले डूबा।
नज़र हर चाहती गौतम,
तुम्हारा अब सितारा हो।।"

सादर,
अशोक "मुसाफ़िर"

Friday, 25 March 2016

"MUSAFIR" KI KALAM SE

1- मन में रंग भरें,
हज़ारों होली पर,
कटुता दूर करें,

बैर नहीं रखना,
ज़िन्दगी हो ऐसी,
बुद्ध शील भरना,

ऐसी इक रीत चले,
अहिंसा शोभित हो,
हर दिल प्रीत फले ,

अपना,अपना,अपना,
भाव न हो मन में,
मनभेद ख़त्म करना,

उपकार बुद्ध करना,
फिर भारत में आकर,
दुःख धरती के हरना,

चहुँदिश खुशहाली हो,
इस धरा का हर कोना,
नफ़रत से खाली हो,


2- "शर्म मजहब पे यूं हमें आती है,
क़त्ल बस्ती का किया है इसने।

उसने नफ़रत से कभी तौबा की थी,
आज ख़ंज़र है लगा फिर रखने।

जब मैं रोता था,वो रो देता था,
आज अश्क़ों पे लगा वो हंसने।"

नमो भारत।।
जय भारत।।

धम्म रात्रि......

आपका अपना,
अशोक "मुसाफ़िर"

बात बातों से बन जाती पर,
कर लिया बैर किस तरह उसने।


आपका,
अशोक "मुसाफ़िर"

JINDAGI MERI NAZAR ME

जिंदगी मेरी नज़र में
देखे मेरी रचना के माध्यम से
यूँ जियें
क्यों जियें
जन्म लेना
बस मरना
है जिंदगी ये
खाना
सोना
ये पशु  समान है
तू एक इंसान है
तुझ में कुछ विशेष
वो तेरा विवेक
क्यों नही है सोचता
पत्थर में क्या खोजता
बन इंसान बस
क्यों रहा है डस
खोजता तू अर्थ
जो वो व्यर्थ
ये सोच ले
नर तू खोज ले।
ज्ञान का प्रकाश दे
झुकता आकाश ले
जन्नत जंहा में होगी
सफल जिंदगी तेरी
यूँ तू जी

चन्द्रगुप्त मौर्य

"MUSAFIR" KI KALAM SE

(ग़ज़ल)तब की बात और थी,अब बात और है,वो भी तो कोई दौर था,अब दौर और है।
पूरब सही,पश्चिम सही,हो कोई भी सीमा,इंसान को बस चाहिये,नफ़रत न और है।
नस्लें गवाही देंगीं,क्यों ढ़ाई वो इमारत,इक शख़्सियत ज़िंदा दबी,इतना ही शोर है।
गर ख़ैरियत का ताना-बाना,यूं रहे हो बन,गफ़लत का फ़ायदा उठाता,कोई और है।
ये अजीब बात है,भूख़ा रहा है सो,देता जो रोटियाँ रहा,उसको न कौर है।
छीनकर बचपन यहाँ,कुछ भी न मिलेगा,आघात है फूलों पे क्यों,तोड़ा जो बौर है।
बेटी को जिसने मारा है,ये सोच "मुसाफ़िर",बेटा चलाये वंश,ना बेटी का ठौर है।



ग़ज़ल.…..अशोक "मुसाफ़िर"

"अपनों की क़द्र,सिर्फ़ अपनों के साथ से होती है,
कौम की क़द्र,सिर्फ़ जज़्बात से होती है।

टूट जाते हैं लोग,झगड़कर अपनों से जब,
बवाल ही बवाल,सिर्फ़ बात घूंसा-लात से होती है।"

अशोक "मुसाफ़िर"

VKAT AA GYA HAI .

सभी साथियों को धम्म प्रभात....नमो भारत.....जय भारत.....!!

ये मौत का तांडव चल रहा है।हत्याएं हो रही हैं।प्रशासन सोया हुआ है।शर्म की बात है।भगवान बुद्ध के देश में हिंसा की इतनी जगह? धिक्कार है ऐसी व्यवस्था और उसके प्रशासन पर।

अब वक़्त आ गया है,कि क्रान्ति का बिगुल बजे,वर्ना विनाश निश्चित है।मैं आवाज़ देता हूँ,ऐसे तमाम संगठनो को जो इस आतंक के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद करें।इसके लिए हम सभी एकजुट हों,जाति और धर्म को बिल्कुल एक तरफ़ रखते हुए।साथिओं,आपको याद होगा,जब हमें आज़ादी की दरकार हुई,हम सब एक हो गए।सारी क़ौमें एक हो गई और सबने सांस नहीं ली,जब तक अँगरेज़ भारत को छोड़ नहीं गए।
हमारा मार्ग हमें खुद बनाना है।सर्वथा उचित होगा,अगर शांतिप्रिय तरीके से हिंसा को नश्तेनाबूत कर दिया जाए।

मुझे फिर अपना एक शेर याद आता है..….

"परेशां दर्द से कोई,हमें आराम नहीं है,
किसी को दर्द देना,ये हमारा काम नहीं है।

शौक़ लोगों का होगा,और के घर को जलाने का,
हमारे शौक़ में नफ़रत का,कहीं नाम नहीं है।"

आपका,
अशोक "मुसाफ़िर"

WORDS FOR ANGRYNESS

1. क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है।
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2- मूर्ख मनुष्य क्रोध को जोर-शोर से प्रकट करता है, किंतु बुद्धिमान शांति से उसे वश में करता है।
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3- क्रोध करने का मतलब है, दूसरों की गलतियों की सजा स्वयं को देना।
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4- जब क्रोध आए तो उसके परिणाम पर विचार करो।
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5- क्रोध से धनी व्यक्ति घृणा और निर्धन तिरस्कार का पात्र होता है।
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6- क्रोध मूर्खता से प्रारम्भ और पश्चाताप पर खत्म होता है।
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7- क्रोध के सिंहासनासीन होने पर बुद्धि वहां से खिसक जाती है।
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8- जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप में नहीं कह सकता, उसी को क्रोध अधिक आता है।
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9- क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है। अतः हमें सदैव शांत व स्थिरचित्त रहना चाहिए।
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10- क्रोध से मूढ़ता उत्पन्न होती है, मूढ़ता से स्मृति भ्रांत हो जाती है, स्मृति भ्रांत हो जाने से बुद्धि का नाश हो जाता है और बुद्धि नष्ट होने पर प्राणी स्वयं नष्ट हो जाता है।
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11- क्रोध यमराज है।
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12- क्रोध एक प्रकार का क्षणिक पागलपन है।
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13-क्रोध में की गयी बातें अक्सर अंत में उलटी निकलती हैं।
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14- जो मनुष्य क्रोधी पर क्रोध नहीं करता और क्षमा करता है वह अपनी और क्रोध करने वाले की महासंकट से रक्षा करता है।
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15- सुबह से शाम तक काम करके आदमी उतना नहीं थकता जितना क्रोध या चिन्ता से पल भर में थक जाता है।
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16- क्रोध में हो तो बोलने से पहले दस तक गिनो, अगर ज़्यादा क्रोध में तो सौ तक।
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17- क्रोध क्या हैं ? क्रोध भयावह हैं, क्रोध भयंकर हैं, क्रोध बहरा हैं, क्रोध गूंगा हैं, क्रोध विकलांग है।
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18- क्रोध की फुफकार अहं पर चोट लगने से उठती है।
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19- क्रोध करना पागलपन हैं, जिससे सत्संकल्पो का विनाश होता है।
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20- क्रोध में विवेक नष्ट हो जाता है।

"MUSAFIR'" KI KALAM SE

(ग़ज़ल)
मन चराग़ों सा रौशन कराया करो,
प्यार के दीप झिलमिल जलाया करो।
बिजलियों से कहो, शोरगुल है मना,
शोर में शोर ना तुम मिलाया करो।
फूल बरसा करो,उन शहीदों पे जा,
अश्रु उन पे नहीं तुम बहाया करो।
आपके शौक़ हैं,कुछ ख़लल है नहीं,
देश हित में कभी धन लगाया करो।
अब न कहना,खुलापन है मन का मिलन,
कुछ मोहब्बत के मधुवन उगाया करो।
देश मेरे करो, ना अँधेरी सुब्हा,
दिन/उजालों से जीवन भराया करो।
क्या मिला लूटकर,हर "मुसाफ़िर"इधर,
जा कहीं और यौवन दिखाया करो।



ग़ज़ल.....अशोक "मुसाफ़िर"

Thursday, 24 March 2016

खवाहिश  नही  मुझे  मशहुर  होने  की।
आप  मुझे  पहचानते  हो  बस  इतना  ही  काफी  है।
अच्छे  ने  अच्छा  और  बुरे  ने  बुरा  जाना  मुझे।
क्यों  की  जीसकी  जीतनी  जरुरत  थी  उसने  उतना  ही  पहचाना  मुझे।
 ज़िन्दगी  का  फ़लसफ़ा  भी   कितना  अजीब  है,
शामें  कटती  नहीं,  और  साल  गुज़रते  चले  जा  रहे  हैं....!!
एक  अजीब  सी  दौड़  है  ये  ज़िन्दगी,
जीत  जाओ  तो  कई  अपने  पीछे  छूट  जाते  हैं,
 और  हार  जाओ  तो  अपने  ही  पीछे  छोड़  जाते  हैं।.

Sunday, 20 March 2016

HAIWANIYAT PR

हैवानियत,इंसानियत पर क्यों कहर ढाये,
है हाथ नहीं,पर दिल में तलवार देखो।

चराग़ जलाओ,खोज लाओ मुहब्बत को,
गर मुक़म्मल ज़िन्दगी को गुलज़ार देखो।

जो वतन को सलामत चाहो तो यारों,
औरों से पहले ख़ुद को ख़ुद्दार देखो।

आवाज़ दो,फिर से तबस्सुम लौट आयेगी,
फिर से मुस्कुराएंगे "हर्ष"हज़ार देखो।

कुछ तो रक्खो "मुसाफ़िर"से
वास्ता अपना,
बिछा डाले हैं रस्तों में क्यों ख़ार देखो।

अशोक "मुसाफ़िर"

MAA

होठों का गीत माँ ही है,
माँ होठों की रागिनी,
माँ के बिना हस्ती नहीं है
कोई आप की।

चन्दा सी चमक देती है सबको ही उजाले,
करना नहीँ माँ को कभी अमावस के हवाले।

होती है कुमाता नहीं,
माँ भी यूं किसी की,
काँटों के बीच हँसती है,
माता की हँसी ही।

प्यारा सा माँ की गोद में संसार भर तो दे,
दुःख दर्द माँ के बांट कर उपकार कर तो ले।

मायने तेरा वजूद क्या,
जब माँ ही रोयेगी,
तक़दीर हर बन्दे की,
जा के दूर सोयेगी।

अशोक "मुसाफ़िर"

" SEVA KRNI HAI TO "


"सेवा करनी है तो, घड़ी मत देखो !
प्रसाद लेना है तो, स्वाद मत देखो !
सत्संग सुनाना है तो, जगह मत देखो !
बिनती करनी है तो, स्वार्थ मत देखो !
समर्पण करना है तो, खर्चा मत देखो !
रहमत देखनी है तो, जरूरत मत देखो !!
"जीत" किसके लिए,
'हार' किसके लिए,
'ज़िंदगी भर' ये 'तकरार' किसके लिए..
जो भी 'आया' है वो 'जायेगा' एक दिन यहाँ से , फिर ये इंसान को
इतना "अहंकार" किसके लिए..


प्रियंका मौर्य 

Saturday, 19 March 2016

III नमो भारत III जय भारत III

"अभी आग़ाज़ है और आगे अंजाम भी अच्छा होगा,

नमो भारत..!!जय भारत...!!

बोलता,भारत का हर बच्चा होगा,


वतन की राह में सज़दा करेंगे,नर और नारी,

नहीं फिर से इधर होगी,कहीं  कोई भी लाचारी,

सभी का धर्म पहला निज देश की रक्षा होगा।"


अशोक "मुसाफिर"

III नमो भारत III जय भारत III

" शिक्षक का राष्ट्र के प्रति कर्तव्य " 

किसी भी घर, समाज तथा राज्य की सुरक्षा से पहले प्रश्न राष्ट्र की सुरक्षा का है। हिमालय से लेकर समुद्र पर्यन्त तक भारत एक है। उसकी पग- पग भूमि हमारी अपनी भूमि है। आप उसी राष्ट्र के अंग है। अगर आपके सिर पर कोई आघात करे, तो क्या आपके हाथ और पैर उसकी रक्षा के लिए नहीं उठेंगे ? ठीक उसी प्रकार राष्ट्र की सुरक्षा के लिए हमें आवाज उठानी होगी। उसके लिए हमें सोंचना होगा और एक साथ कदम से कदम मिलाकर चलना भी होगा।
यह राष्ट्र गौरवशाली तब होगा जब यह राष्ट्र अपने जीवन मूल्यों और परम्पराओं का निर्वहन करने के लिए सक्षम होगा। यह राष्ट्र सफल और सक्षम तब होगा जब शिक्षक अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करने में सफल होगा। शिक्षक सफल तब कहा जायेगा जब वह प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करने में सफल होगा।
यदि व्यक्ति राष्ट्रभाव से शून्य है, राष्ट्रभाव से हीन है, अपनी राष्ट्रीयता के प्रति सजग नहीं है, तो यह शिक्षक की असफलता है। हमारा अनुभव साक्षी है कि राष्ट्रीय चरित्र के अभाव में हमने राष्ट्र को अपमानित होते देखा है। हमारा अनुभव है कि शस्त्र से पहले हम शिक्षा के आभाव से पराजित हुए है। हम शस्त्र और शिक्षा को धारण करने वालों को राष्ट्रीयता का बोध नहीं करा पाये और वक्त से पहले खंड-खंड हमारी राष्ट्रीयता हुई। शिक्षक इस राष्ट्र की राष्ट्रीयता व सामर्थ को जागृत करने में असफल रहा। यदि शिक्षक पराजय स्वीकार कर ले तो पराजय का वह भाव राष्ट्र के लिए घातक होगा। वेद वंदना के वजाय राष्ट्रवंदना का स्वर सभी दिशाओं में गूंजने आवश्यक है। आवश्यक है कि वयक्ति व् व्यवस्था को आभास कराना कि यदि व्यक्ति की राष्ट्र की उपासना में आस्था नहीं रही तो उपासना के अन्य मार्ग भी संघर्षमुक्त नहीं रह पाएंगे। अतः व्यक्ति से व्यक्ति, व्यक्ति से समाज, समाज से राष्ट्र का एकीकरण आवश्यक है। अतः शीघ्र ही व्यक्ति, समाज व राष्ट्र को एक सूत्र में बांधना होगा। वह सूत्र राष्ट्रीयता ही हो सकती है। शिक्षक इस चुनौती को स्वीकार करें। शीघ्र ही राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए अपने को सिद्ध करें। संभव है कि आपके मार्ग में बाधाएँ आएँगी , पर शिक्षक को उनपर विजय पानी होगी। आवश्यकता पड़े तो शिक्षक कठिनाइयों का मुकाबला करने में भी पीछे न हटे। मैं स्वीकार करता हूँ कि शिक्षक का सामर्थ, ज्ञान है। यदि मार्ग में कोई भी बाधा हो और राष्ट्रमार्ग की बाधा में यह सिर्फ कंटक की ही भाषा समझते हो तो शिक्षक को अपने सामर्थ का परिचय देना होगा। सामर्थहीन शिक्षक अपने ज्ञान की भी रक्षा नहीं कर पायेगा। संभव है कि राष्ट्र को एक सूत्र में बढ़ने के लिए सत्ता से भी लड़ना पड़े तो याद रहे सत्ता से ज्यादा राष्ट्र महत्वपूर्ण है। अतः राष्ट्र के वेदी पर यदि सत्ताओं की आहुति देनी पड़े तो भी शिक्षक संकोच ना करे। इतिहास साक्षी है कि सत्ता और स्वार्थ की राजनीति ने इस राष्ट्र का विनाश किया है। हमें अब सिर्फ इस राष्ट्र का विचार करना है। यदि शासन साथ दे तो ठीक है वरना शिक्षक आपने पूर्वजो की पुण्य और कीर्ति का स्मरण कर इस जिम्मेदारी का निर्वाह करने को सिद्ध हो। विजय निश्चित है। विजय निश्चित है इस राष्ट्र के जीवन मूल्यों की। विजय निश्चित है इस राष्ट्र की। आवश्यकता है सिर्फ आपके कदम से कदम मिलाकर चलने की।
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अखंड भारत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
सम्राट प्रियदर्शी युथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया
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